Wednesday, February 3, 2021

बीस तारीख़

 आज फ़िर बीस तारीख़ है 

मन बेचैन है एक जगह सूनी है

आँख़ों में वो चेहरा, कानों में वो गूँज अभी सुनी है

दिल में एक कसक, होंठों पे एक नाम

दिमाग़ में वही बात, आज फ़िर बीस तारीख़ है

लाता अपने साथ कुछ नहीं न्सान है  

फ़िर दे जाता क्यों इतनी याद है

जब जी चाहे आ जाए कहीं से भी

रात हो दिन हो या हो सुबहोशाम

ख़्याल में वही बात, आज फ़िर बीस तारीख़ है

जो आया है उसने जाना है यही बस एक फ़साना है

फ़िर भी इन्सान कर रहा अपनी चीज़ों से इतना मोह प्यार है

सवाल में भी वही बात, क्यों आज बीस तारीख़ है?

एक साल बीता बिन पुकारे, आज वही बीस तारीख़ है?

जिसमें गईं थीं वो छोड़कर, आज वही बीस तारीख़ है? 

                                         - उषालेखन्या

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