Monday, February 22, 2021

बहारें आएँगीं

बहारें आएँगीं, नवकमल प्रफ़ुल्लित होंगें

पहले की तरह शामें और दिन खिलेंगे 

राही एक नई उमंग के साथ चलेंगें

डर को कर दरकिनार, रास्ते मज़िलों से मिलेंगें

भीड़ में, वही पुराना अन्दाज़ आएगा 

जब सब हँस-हँस कर पास-पास रहेंगें

मुखौटे उतरेंगें, दस्ताने हटेंगे

दूर से नहीं, पास जा कर गले मिलेंगें

बहारें आएँगीं, नवकमल प्रफ़ुल्लित होंगें

आशान्वित हम सब, कि अब 

बहारें आएँगीं, नवकमल प्रफ़ुल्लित होंगें।

                                - उषालेखन्या

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