Wednesday, February 3, 2021

दौड़

  

आज और कल की इस दौड़ में

न सोता न जागता इंसान

सोता तो सैकड़ों ताना बाना लिए

और जागता तो करोड़ों आशाएँ लिए

आज और कल की इस दौड़ में

न सोता न जागता इंसान।

 

ज़िंदगी की भागदौड़ में

हज़ारों सपने लिए

चमचमाती असंख्य आँखें

टिमटिमाते सपने लिए

आज और कल की इस दौड़ में

न सोता न जागता इंसान।

 

होगी सत्यता साकारता

इस सोच को करे जीवंत

आकांक्षाएँ और तृष्णाओं को साथ लिए

आज और कल की इस दौड़ में

न सोता न जागता इंसान।

                           -उषालेखन्या

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